इतिहास
अबतक के सांगठनिक सफर की उपलब्धियाँ :-
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स्थापना सम्मेलन :- 16.08.1995 को समस्तीपुर में। संस्थापक एवं बाईंलॉज (संविधान) निर्माता:- श्री शिव पूजन ठाकुर, रूपौलीघाट (दरभंगा)।
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सामाजिक जवाबदेही :- आपसी गोलबंदी एवं सामाजिक जागरूकता अभियान के तहत मान्यजनों के सहयोग से गाँव-पंचायत स्तर पर गोष्ठी-संगोष्ठी का आयोजन।
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विवाद विहीन समाज की स्थापना हेतु अपनों के बीच झंझटों का निपटारा कराना।
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दहेज रहित शादी एवं पहली पत्नी के सहमति के बगैर दूसरी शादी पर रोक हेतु प्रभावी कार्यक्रम के तहत लोगों को जागरूक करना/सहमत करना।
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ट्राईसम योजना की सूची में बढ़ईगीरी को शामिल करा कर, औजार वितरण प्रखंड समिति में प्रखंड सचिव को सदस्य बनवाना। योजनांतर्गत मुफ्त औजार दिलवाना।
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डवाकरा योजना में भी बढ़ईगीरी एवं तांत बिनाई को शामिल कराया गया था, जिससे हजारों की संख्या में महिलायें प्रशिक्षण ले सकी थीं।
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श्रम विभाग की मजदूरी निर्धारण सूची में ‘बढ़ईगीरी’ को शामिल कराना, जिसके कारण अकुशल एवं कुशल बढ़ई मजदूरों का मजदूरी दर निर्धारित हो रहा है और कल्याण बोर्ड की योजनाओं का लाभ मिल रही है।
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बच्चों के बीच पठन-पाठन सामग्री का मुफ्त वितरण एवं इनमें प्रतियोगी भावना पैदा करने हेतु जिला स्तरीय क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन करना।
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कम खर्च पर आवासीय सुविधायुक्त पढ़ाई की व्यवस्था करना। यद्यपि, असहयोग के कारण आंशिक सफलता मिल सकी, जबकि इसकी आज भी दरकार है।
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आपदा में राहत :- बाढ़-भूकम्प जैसी आपदा सहित आकस्मिक घटना-दुर्घटना में मजदूरों को मदद पहुँचाना। घटना सुनते ही स्थानीय पदाधिकारी को भेजना।
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हाजीपुर मेला में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन करना/कराना।
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लकड़ी के टी.पी. का अधिकार डी.एफ.ओ. से हटा कर मुखिया जी को दिलवाना।
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संगठन की स्वीकारिता :- उक्त कार्यक्रमों एवं उपलब्धियों के कारण तब के सभी संगठनों ने निबंधित इस संगठन के बैनर को 2004 तक स्वीकार कर लिया।
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ई.बी.सी. का अधिकार :- 12 अप्रैल 2004 को सम्पन्न संगठन की राज्य स्तरीय बैठक से बढ़ई को ई.बी.सी. में शामिल कराने का प्रस्ताव पारित करना।
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प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली “केन्द्र एवं राज्य सम्पोषित रोजगारोन्मुखी योजनाओं की जिला स्तरीय निगरानी एवं अनुश्रवण समिति” में संगठन के जिला सचिवों को सदस्य नामित कराना।
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भारत सरकार के पैसा से दिल्ली एवं मुम्बई में ऐसी सुविधायुक्त प्रशिक्षण में अपने लोगों को भेजना। अबतक 1987 लोग प्रशिक्षित हुए। प्रशिक्षण पुन: शुरू होगी।
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वोटों का बिखराव पर रोक लगाने के लिये सजगता कार्यक्रम।
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बढ़ई का रोजगार छीननेवाला भारतीय वन अधिनियम 1927 यथा बिहार संशोधन 1990 के तहत वन विभाग के द्वारा रैयती लकड़ी कटाई पर भी रोक लगा दी गई थी और आरा मिलों की संख्या घटा दी गई थी। इसके खिलाफ आंदोलन शुरू की गई। संगठन को माननीय सुप्रीम कोर्ट एवं तीन बार माननीय हाई कोर्ट जाना पड़ा है। तब जाकर लकड़ी फ्री हुई, 1910 से 3200 आरा मिलों की संख्या बढ़ी।
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उक्त मांग सहित बढ़ई को अति-पिछड़ा वर्ग (ई.बी.सी.) में शामिल कराने के लिये “घर से सड़क तक”, “घेर लो कलक्टर को”, गाँधी मैदान से “विधान सभा मार्च” और “विधान सभा का घेराव” कार्यक्रम किया गया। श्री नीतीश बाबू से 2005 की चुनाव के पूर्व वार्ता हुई। इनकी सरकार बनी। तब अति पिछड़ा आयोग का गठन हुआ। अध्यक्ष का कार्यालय एवं संसाधन के लिये पटना में “धरना-प्रदर्शन” करना पड़ा था। तब जाकर आयोग का काम और गाँव स्तर पर सर्वे प्रारम्भ हुई। ई.बी.सी. होने के समर्थन में सर्वे टीम के समक्ष बातों को रखने के लिये संगठन के पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। सर्वे सफल रहा। तत्कालीन माननीय कृषि मंत्री स्व. नरेन्द्र सिंह के सहयोग से सर्वे-रिपोर्ट को मंत्रीमंडल से पारित कराया गया। अंतत: जुलाई 2009 में ईबीसी की अधिसूचना जारी हुई।
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ई.बी.सी. लाभ के कारण ही त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थानों में विश्वकर्मा प्रतिनिधित्व की शून्यता समाप्त हुई और नौकरी में बढ़ई की हकमारी बन्द हुई है।
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सरकार की योजनाओं की जानकारी के लिये प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करना।
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‘बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड’ का सदस्य बनवाना, जिसके कारण सदस्यों को कल्याण बोर्ड की सभी 16 आर्थिक योजनाओं का लाभ मिला है/मिल रहा है। अबतक 19 करोड़ 63 लाख रुपये संगठन के लोगों के खाता में जा चुका है। दूसरे संगठनों से दिग्भ्रमित हुए बगैर हमारे भाई इस संगठन का सदस्य बनते तो यह राशि अबतक 50 करोड़ तक रहती।
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लंबित 11 सूत्री मांगों के लिये 24 जनवरी 2023 को राज्य के सभी जिला कलक्टर के निकट धरना-प्रदर्शन का आयोजन एवं सरकार तक मांग पत्र भिजवाना।
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कल्याण बोर्ड की जिला एवं प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण समिति में संगठन के पदाधिकारी को सदस्य बनवाना।
भाईयों एवं बहनों/समाज के नेताओं, आपके इस संगठन में पदाधिकारियों का चुनाव पंचायत/प्रखंड/जिला व राज्य अधिवेशन से की जाती है न कि लेटर पैड पर नामित किया जाता है। बायलॉज व सदस्यता आधारित यह एक जुझारू संगठन है जो खुशामद नहीं अपितु, आंदोलन पर विश्वास करती है। मांगों को प्राप्त करने हेतु अबतक 28 धरना-प्रदर्शन, राज्य एवं जिला में 13 सड़क मार्च, 2 रैली कर चुकी है। हजारों में सांगठनिक बैठक/अधिवेशन हैं। इनसब कार्यक्रमों का फल है उक्त सभी उपलब्धियाँ। वैसे तो इन उपलब्धियों के पीछे संगठन के पदाधिकारियों (सबों का नाम लिखना संभव नहीं है) तथा सम्पूर्ण बिहार के बढ़ई भाईयों का आंदोलित स्वरूप है। परंतु, इस कारवाँ के नेतृत्व का श्रेय श्री राम भरोस शर्मा को देना श्रेयस्कर होगा, जिन्होंने इस संगठन को बिहार के गाँव-गाँव सहित पड़ोसी राज्य और दिल्ली तक पहुँचाया है।
