सामंती अत्याचार की कहानी

सामंती अत्याचार की कहानी - प्रकाषित मई 1981 से स्वतंत्र भारत में सामंती गुलामी से आजादी के मसीहा थे स्व॰ कामेष्वर प्रसाद शर्मा (14 जनवरी 1936 से 22 जून 1998) जयंती समारोह दिनांक 14 जनवरी 2023

सामंती अत्याचार की कहानी – प्रकाषित मई 1981 से
स्वतंत्र भारत में सामंती गुलामी से आजादी के मसीहा थे स्व॰ कामेष्वर प्रसाद शर्मा
(14 जनवरी 1936 से 22 जून 1998) 
जयंती समारोह दिनांक 14 जनवरी 2023
 
गुलामी से आजादी की लड़ाई की शुरूआत:- 30 मार्च 1954 से हुई। ठक्को दास जी ने खतियानी कास्त भूमि का सरकारी लगान निर्धारण एवं रसीद देने को लेकर अनुमंडल पदाधिकारी समस्तीपुर के यहॉं 6 मार्च 1954 को एक आवेदन दिये थे। इसी बात को लेकर स्थानीय जमीन्दारों ने ठक्को दास एवं इनके परिवार के साथ 30 मार्च को मार-पीट किया। घर जला दिया। मरा समझ ठक्को दास को फेक दिया। मार-पीट से पत्नी की गर्भपात होगी। केस हुआ मगर डर से कोई गवाही देने के लिये तैयार नहीं हुआ। तब श्री कामेष्वर बाबू ने ठक्को दास के जुल्म के खिलाफ डी.एम. दरभंगा के यहॉं आवेदन दिये थे। जॉंच हुई। कामेष्वर बाबू का सहयोग पाकर ठक्को दास के भाई बलदेव दास जी केस किये थे।
ठक्को दास के घर को कामेष्वर बाबू खड़ा होकर बनवाया जिसमें श्री योगेन्द्र झा का सहयोग मिला था। कामेष्वर बाबू को हत्या करने के लिये जमीन्दारों ने गुण्डा बहाल किये और कामेष्वर बाबू के पिता जी श्री सरयुग प्रसाद शर्मा चाचा श्री यमुना प्रसाद शर्मा और भाई श्री बैद्यनाथ प्रसाद शर्मा जी को कामेष्वर बाबू को हवाले करने का फरमान सुनाया गया।
22 अगस्त 1954 को बिनोवा भावे को बोधगया से बुलाकर लाये थे। फिर इनके साथ बैठकों का दौर शुरू हुआ। बिनोवा भावे के साथ भी जमिन्दरों ने अभद्र व्यवहार किया था। कामेष्वर बाबू के माता जी बिनोवा भावे को दही का छांछ पीने के लिये दी थी, जिसे जमिन्दारों ने पीने नहीं दिया था।
और शुरू हो गई स्वतंत्र भारत में गुलाम बंधुआ मजदूरों को आजाद कराने की लड़ाई जो स्व0 कामेषर बाबू के मरनोपरांत समाप्त हुआ।
सहयोगी:- 
संत बिनोबा भावे 22 अगस्त 1954 को
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद, जिन्होंने कामेष्वर बाबू के अनुरोध पर बन्दा आये थे तथा इनके आदेष पर 33 जमीन्दारों को जेल जाना पड़ा था।
भारत के 7वें राष्ट्रप्रति ज्ञानी जैल सिंह (विष्वकर्मा) तब गृह मंत्री थे
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं श्रीमति इन्दिरा गांधी 
पूर्व राज्यपाल आर.डी. भंडारे
माननीय पूर्व मुख्यमंत्री श्री दारोगा प्रसाद राय
विरोधी दल के नेता जननायक कर्पूरी ठाकुर एवं अपने मुख्यमंत्रीत्व काल में भी
माननीय पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र 
माननीय तात्कालीन मंत्री लहटन चौधरी एवं राजस्व मंत्री रामजयपाल सिंह यादव
डुमरा के श्री गोविन्द पासवान
पिपरौलिया के स्व. बहोर मुखिया और हरेकृष्ण मुखिया
 
विधवा सियावती एवं इनके देवर झोटी महतो, श्रीमती रामसुन्द्री देवी एवं चन्द्रकला देवी
श्री योगेन्द्र झा एवं श्री जामुन ठाकुर एवं इनके भाई श्री राम ठाकुर
गॉंव के चौकीदार श्री सुकन पासवान, श्री गोविन्द पासवान और श्री हरूणी पासवान
गॉंव के हीं पुलकित दास, श्री रूपलाल पासवान, श्री नेवालाल पासवान
गॉंव के हीं श्री गोगल शर्मा, श्री कुलो शर्मा, श्री झोटी महतो, श्री दारोगा पासवान
कामेष्वर बाबू के पिता श्री सरयुग प्रसाद शर्मा, चाचा श्री यमुना प्रसाद शर्मा और भाई श्री बैद्यनाथ प्रसाद शर्मा और इनकी माताश्री
किसान नेता श्री सियाराम भगत, श्री पवन कु. राय, श्री गणेष प्रसाद, जय ना. साह, श्री राम सागर राम, श्री बतहु राम, श्री जीवछ प्रसाद सिंह, श्री दुखा महतो, श्री जीवछ महतो, श्री नक्छेदी पोद्यार, श्री नेंगर मुखिया, श्री दुर्गा पासवान, श्री सुखो पंडित, श्री जामुन पोद्यार, श्री गणेष पासवान, श्री पवन कुमार राय, श्री बालगोबिन्द पासवान, श्री माधो मंडल, श्री रामेष्वर साह, श्री कमल डोम, श्री योगेन्द्र मोची, श्री नेंगर मुखिया, श्री उन्मन पासवान, श्री शालीग्राम पासवान, श्री टुकाई दास, श्री बाबाजी पासवान, 
मुक्ति एवं पुनर्वास समिति का गठन एवं इसके सदस्य: श्री राम खेलावन पासवान, श्री बाबाजी पासवान, श्री दुखा पासवान, श्री प्रेम पासवान
चुनाव: 1977 में विधान सभा चुनाव लड़े जिसमें बूथ कैप्चरिंग के आधार पर इन्हें हराया गया। तब श्री शर्मा जेल मे थे।
पदाधिकारी में: मुख्य सचिव श्री पी.पी. नैयर, गृह सचिव श्री के.बी. सक्सेना, कमिस्नर सतीष भटनागर, सरदार मोहिन्दर सिंह, डी.एम. जियालाल आर्य, एस.डी.ओ. श्री एन.सी. नारायनन
अंगरक्षक सिपाही 495 श्री अर्जुण दास
अधिवक्ता में: सर्वोच्च न्यायालय के विज्ञ अधिवक्ता श्री एस.एस. शुक्ला. श्री शुक्ला के अनुसार श्री कामेष्वर बाबू ने सर्वोच्च न्यायालय में हिन्दी में बहस करने के लिये माननीय न्यायाधीष को भी बजबूर कर दिया था। कीर्तिमान स्थापित किया। वे खुद अपना पक्ष हिन्दी में रखे थे।
समस्तीपुर में श्री बिन्देष्वर ठाकुर 
मुकदमा:- स्व. कामेष्वर बाबू 42 फौजदारी और 133 दिवानी मुकदमों के षिकार हुये। जेल:- 6 बार जेल गये। कुल मिलाकर साढ़े तीन साल जेल में बिताये। 
इलाज:- सामंतों ने तीन-तीन बार इनकी पिटाई की। इलाज वास्ते कुल 3 माह 26 दिन अस्पताल में रहें हैं।
जीवनकाल:- अविवाहित। 52 साल 5 माह 8 दिन में 18 साल की अवस्था को घटा दिया जाए तो 34 साल 5 माह 8 दिन की इनकी आयु श्री कामेष्वर नगर के गरीबों-मजदूरों के लिये समर्पित रहा है, जो अत्यंत हीं संघर्षपूर्ण प्रमाणित है। इस अवधि में कामेष्वर बाबू 3 साल 6 माह जेल में रहे तथा सामंतों के अत्याचार से हुई शारीरिक प्रतारणा के इलाज वास्ते कुल 2 माह 26 दिन अस्पतालों में बितायें हैं।
परिवार के लिये समय:- श्रीकामेष्वर नगर के लोगों को हीं वे अपना परिवार मानते थे।
जमीन्दारों के गवाह:- सनरूप दास, राधा मुखिया, खोखाई मोची, धनराज यादव, सनरूप दास  
 
 
 
 
 
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